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Retirement Fund Investment: बैंक एफडी से बेहतर है सीनियर सिटिज़न सेविंग्स स्कीम, जानें इसके फायदे और रिटर्न

On: 10 November, 2025
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Retirement Fund Investment
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रिटायरमेंट के बाद की ज़िंदगी को आर्थिक रूप से सुरक्षित और तनावमुक्त बनाना हर किसी की प्राथमिकता होती है। उम्र के इस पड़ाव पर निवेश से जुड़ा हर निर्णय सावधानीपूर्वक लिया जाना चाहिए, क्योंकि जोखिम उठाने की क्षमता सीमित हो जाती है। अक्सर देखा जाता है कि रिटायरमेंट के बाद लोग अपनी बचत को बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में डाल देते हैं, यह मानकर कि यह सबसे सुरक्षित विकल्प है। हालांकि, मौजूदा समय में FD पर मिलने वाला ब्याज अपेक्षाकृत कम है, जो महंगाई दर को मात नहीं दे पाता। ऐसे में, एक बेहतर और सुरक्षित विकल्प बनकर सामने आई है – सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम (SCSS)

यह स्कीम न केवल सुरक्षा की गारंटी देती है, बल्कि इसके तहत मिलने वाला ब्याज भी बैंक एफडी की तुलना में अधिक है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि रिटायरमेंट फंड को कहां और क्यों जमा करें – बैंक एफडी या फिर SCSS में?

Senior Citizens Savings Scheme (SCSS) क्या है?

सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम भारत सरकार द्वारा चलाई जाने वाली एक रिटायरमेंट केंद्रित स्मॉल सेविंग स्कीम है। इसे विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि उन्हें रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित और नियमित आय का स्रोत मिल सके। यह योजना पोस्ट ऑफिस और कुछ चुनिंदा बैंकों के माध्यम से उपलब्ध है और इसमें मिलने वाला ब्याज निश्चित और सरकार द्वारा गारंटीकृत होता है।

SCSS vs Bank FD

मानदंडबैंक एफडीSCSS
ब्याज दर6.5% से 7.25% (वरिष्ठ नागरिकों के लिए)8.2% सालाना
पूंजी सुरक्षा₹5 लाख तक DICGC की गारंटीपूरी राशि पर सरकार की गारंटी
ब्याज भुगतानमासिक/त्रैमासिक/मैच्योरिटी परत्रैमासिक
टैक्स लाभकेवल कुछ FD में80C के अंतर्गत ₹1.5 लाख तक छूट

इस तुलना से स्पष्ट है कि SCSS, बैंक एफडी की तुलना में बेहतर विकल्प साबित होता है, विशेष रूप से जब निवेश का उद्देश्य नियमित आय और सुरक्षा दोनों हो।

SCSS की मुख्य विशेषताएं

1. सरकारी गारंटी के साथ सुरक्षित निवेश

SCSS एक ऐसी योजना है, जिसमें निवेश की गई पूंजी पूरी तरह से सरकार द्वारा सुरक्षित मानी जाती है। बैंक एफडी में जहां ₹5 लाख तक की गारंटी मिलती है, वहीं SCSS में पूरी राशि पर सरकार की सॉवरेन गारंटी होती है।

2. उच्च ब्याज दर

वर्तमान में SCSS पर 8.2% सालाना ब्याज मिल रहा है, जो कि कई बैंकों की वरिष्ठ नागरिक एफडी दरों से कहीं अधिक है। यह ब्याज हर तीन महीने में आपके खाते में ट्रांसफर किया जाता है, जिससे आपको नियमित इनकम मिलती है।

3. नियमित आय का भरोसेमंद स्रोत

रिटायरमेंट के बाद पेंशन के अलावा कोई अन्य स्थिर इनकम स्रोत न होने पर SCSS जैसे विकल्प बड़ी राहत देते हैं। प्रत्येक तिमाही मिलने वाला ब्याज एक नियमित आमदनी की तरह कार्य करता है।

4. उच्च निवेश सीमा

SCSS में एक व्यक्ति अधिकतम ₹30 लाख तक का निवेश कर सकता है। पति-पत्नी दोनों मिलकर अलग-अलग खाते खोल सकते हैं, जिससे यह सीमा ₹60 लाख तक बढ़ जाती है।

निवेश और ब्याज कैलकुलेशन का विश्लेषण

मान लीजिए कोई वरिष्ठ नागरिक SCSS में अधिकतम ₹30 लाख निवेश करता है। ऐसे में ब्याज का विस्तृत कैलकुलेशन इस प्रकार है:

  • निवेश राशि: ₹30,00,000
  • ब्याज दर: 8.2% सालाना
  • त्रैमासिक ब्याज: ₹60,150
  • सालाना ब्याज: ₹2,40,600
  • 5 वर्षों में कुल ब्याज: ₹12,03,000
  • 5 वर्षों में कुल रिटर्न: ₹42,03,000

यदि पति-पत्नी दोनों ने अलग-अलग खाते खोले हैं और ₹60 लाख का संयुक्त निवेश किया है, तो कुल ब्याज सालाना ₹4,81,200 तक पहुंच सकता है।

खाता खोलने की योग्यता

SCSS खाता खोलने के लिए निम्नलिखित लोग पात्र हैं:

  • भारत के निवासी, जिनकी उम्र 60 वर्ष या अधिक हो।
  • 55 से 60 वर्ष की आयु के वे लोग जो स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) या सुपरएनुएशन के तहत रिटायर हो चुके हैं।
  • रिटायर्ड डिफेंस कर्मी, जिनकी उम्र कम से कम 50 वर्ष हो।
  • NRI और HUF इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।

खाता खोलने की प्रक्रिया

  1. कहां खोलें खाता:
  • निकटतम पोस्ट ऑफिस या SCSS अधिकृत बैंक शाखा में जाकर।
  1. दस्तावेज़:
  • Form A (स्कीम का आवेदन पत्र)
  • पहचान और पता प्रमाण (आधार, पैन आदि)
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • निवेश की राशि चेक या नकद (₹1 लाख से अधिक चेक/ड्राफ्ट से)

निवेश की सीमा

  • न्यूनतम निवेश राशि: ₹1,000
  • अधिकतम निवेश सीमा: ₹30 लाख (एकल खाता)
  • संयुक्त खाता (पति-पत्नी): ₹30 लाख
  • दोनों के अलग-अलग खाते: ₹60 लाख तक संयुक्त निवेश

टैक्स लाभ

  • धारा 80C के तहत, आप ₹1.5 लाख तक की राशि पर टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं।
  • हालांकि, यदि ब्याज आय ₹50,000 सालाना से अधिक हो जाती है, तो TDS (Tax Deducted at Source) कट सकता है।
  • TDS से बचाव के लिए फॉर्म 15H भरकर जमा कर सकते हैं (यदि पात्र हों)।

योजना की अवधि और विस्तार

  • मैच्योरिटी अवधि: 5 वर्ष
  • विस्तार की सुविधा: 3 वर्षों के लिए और बढ़ाया जा सकता है।
  • कुल अवधि: अधिकतम 8 वर्ष

विस्तार के लिए खाता धारक को मैच्योरिटी के समय आवेदन देना होता है। इस दौरान ब्याज दर वही होगी, जो विस्तार की तारीख पर लागू होगी।

समय से पहले खाता बंद करने के नियम

  • 1 वर्ष से पहले बंद करने पर: कोई ब्याज नहीं मिलेगा; पहले मिला ब्याज भी वापस लिया जाएगा।
  • 1-2 वर्ष के भीतर बंद करने पर: कुल जमा राशि पर 1.5% कटौती
  • 2-5 वर्ष के भीतर बंद करने पर: कुल राशि पर 1% कटौती
  • विस्तारित खाता 1 वर्ष बाद बंद करने पर: कोई पेनल्टी नहीं

SCSS के फायदे – एक नजर में

लाभविवरण
सरकारी सुरक्षा100% सॉवरेन गारंटी
उच्च ब्याज दर8.2% सालाना
नियमित इनकमत्रैमासिक ब्याज भुगतान
टैक्स छूट80C के तहत ₹1.5 लाख तक छूट
खाता विस्तार की सुविधा5 साल के बाद 3 साल और
सरल खाता खोलने की प्रक्रियापोस्ट ऑफिस या अधिकृत बैंक में
उच्चतम निवेश सीमाव्यक्तिगत ₹30 लाख, दंपती ₹60 लाख

निष्कर्ष: FD की बजाय SCSS क्यों चुनें?

रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा बेहद जरूरी होती है। यदि आप या आपके माता-पिता बैंक एफडी को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं, तो एक बार सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम (SCSS) पर जरूर विचार करें। FD की तुलना में SCSS में:

  • बेहतर ब्याज दर
  • सरकारी गारंटी
  • नियमित इनकम का भरोसा
  • टैक्स में छूट

जैसे फ़ायदे मिलते हैं। यह योजना विशेष रूप से उन लोगों के लिए आदर्श है, जो कम जोखिम के साथ अपने रिटायरमेंट फंड से अधिकतम लाभ प्राप्त करना चाहते हैं।

उपयोगी सुझाव

  • SCSS में निवेश से पहले अपनी आयु, रिटायरमेंट स्थिति और टैक्स स्लैब का आंकलन करें।
  • TDS से बचाव के लिए फॉर्म 15H समय पर भरें।
  • अधिक निवेश करने के लिए पति-पत्नी दोनों के नाम से खाते खोलें।
  • ब्याज राशि को सेविंग अकाउंट में ट्रांसफर कराने के लिए पोस्ट ऑफिस या बैंक से निर्देशित करें।

निष्कर्षतः, अगर आप सोच रहे हैं कि रिटायरमेंट फंड कहां जमा करें, तो बैंक FD की बजाय SCSS को प्राथमिकता देना एक बेहतर और समझदारी भरा निर्णय हो सकता है। यह योजना न केवल सुरक्षा और भरोसे का प्रतीक है, बल्कि इसके जरिए आप एक स्थिर और उच्च रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं।

Rohit Saini

Founder & Chief Editor, BulletinBull.com With a commitment to timely and reliable journalism, Bulletin Bull has become one of India’s most trusted digital media platforms—driven by his clear vision and strong leadership.

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