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Insurance Policy लेने से पहले जरूर जानें ये 7 जरूरी बातें: सम एश्योर्ड से लेकर वेटिंग पीरियड और राइडर्स तक

On: 20 November, 2025
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Insurance Policy
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जीवन में अनिश्चितता एक कटु सत्य है। कब कौन सी घटना घट जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। मेडिकल इमरजेंसी, दुर्घटनाएं या किसी प्रियजन की आकस्मिक मृत्यु जैसी स्थितियां न केवल भावनात्मक झटका देती हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी हमें बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों से सुरक्षा के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी का चयन करना बेहद जरूरी हो जाता है।

हालांकि, इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदना केवल एक औपचारिकता नहीं है। यह एक गंभीर वित्तीय निर्णय है, जिसमें आपकी व्यक्तिगत जरूरतें, आर्थिक स्थिति और संभावित जोखिमों को समझना आवश्यक होता है। यदि आप हेल्थ इंश्योरेंस या लाइफ इंश्योरेंस लेने का विचार कर रहे हैं, तो आपको सम एश्योर्ड, वेटिंग पीरियड, राइडर्स, एक्सक्लूज़न, क्लेम सेटलमेंट रेश्यो और प्रीमियम जैसे पहलुओं पर विस्तार से समझ बनानी चाहिए।

इस लेख में हम विस्तार से समझाएंगे कि एक प्रभावी और लाभकारी इंश्योरेंस पॉलिसी चुनने के लिए किन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है।

1. अपनी जरूरतों का संपूर्ण विश्लेषण करें

हर व्यक्ति की जीवनशैली, स्वास्थ्य स्थिति, जिम्मेदारियां और वित्तीय पृष्ठभूमि अलग होती है। इसलिए इंश्योरेंस पॉलिसी का चुनाव करते समय ‘वन साइज फिट्स ऑल’ का दृष्टिकोण नहीं अपनाया जा सकता।

Health Insurance के लिए जांचें:

  • परिवार के सदस्यों की मेडिकल हिस्ट्री
  • वर्तमान बीमारियां या हेल्थ कंडीशंस
  • पिछले अस्पताल खर्चों का रेकॉर्ड
  • जीवनशैली आधारित जोखिम जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप

Life Insurance के लिए विचार करें:

  • कुल वार्षिक आय और उसका स्रोत
  • बच्चों की पढ़ाई, गृह ऋण जैसी जिम्मेदारियां
  • आश्रितों की संख्या और उनकी भविष्य की जरूरतें

जरूरतों का स्पष्ट आकलन न करने पर या तो अंडरकवरेज पॉलिसी ली जाती है या अनावश्यक महंगी पॉलिसी। इसलिए, पहले स्वयं का सही मूल्यांकन करें।

2. Sum Assured का चयन रणनीति के साथ करें

सम एश्योर्ड वह राशि होती है, जो बीमित व्यक्ति के साथ कोई अनहोनी होने पर कंपनी द्वारा प्रदान की जाती है। इसका सही निर्धारण आपकी पॉलिसी की प्रभावशीलता तय करता है।

Health Insurance में सम एश्योर्ड:

वर्तमान समय में अस्पतालों के खर्च तेजी से बढ़े हैं। एक सामान्य सर्जरी भी लाखों रुपये खर्च करवा सकती है। ऐसे में न्यूनतम ₹10-15 लाख का हेल्थ कवर आज की जरूरत बन गया है।

Life Insurance में सम एश्योर्ड:

यदि आपकी वार्षिक आय ₹6 लाख है, तो आदर्श सम एश्योर्ड ₹60-90 लाख होना चाहिए, ताकि आपकी अनुपस्थिति में भी परिवार आर्थिक रूप से स्थिर रहे।

3. पॉलिसियों की आपस में तुलना करना अनिवार्य है

आज मार्केट में सैकड़ों इंश्योरेंस कंपनियां अलग-अलग पॉलिसी प्लान्स लेकर आई हैं। प्रत्येक कंपनी कवरेज, प्रीमियम, राइडर्स, क्लेम प्रोसेस और नेटवर्क अस्पताल जैसी सुविधाओं में भिन्नता रखती है।

तुलना करते समय ध्यान दें:

  • कैशलेस हॉस्पिटल नेटवर्क: आपके शहर में कितने नजदीकी अस्पताल नेटवर्क में शामिल हैं?
  • क्रिटिकल इलनेस कवरेज: क्या गंभीर बीमारियां कवर की जाती हैं?
  • क्लेम सेटलमेंट रेश्यो (CSR): बीमा कंपनी कितने प्रतिशत क्लेम का भुगतान करती है?
  • प्रीमियम राशि: क्या वह आपकी मासिक या वार्षिक बजट में फिट बैठती है?
  • रिन्यूअल शर्तें और ग्रेस पीरियड

ऑनलाइन इंश्योरेंस तुलना प्लेटफॉर्म जैसे Policybazaar, Coverfox या InsuranceDekho का उपयोग कर आप इस प्रक्रिया को सरल बना सकते हैं।

4. Riders और Add on का सही चयन करें

इंश्योरेंस पॉलिसी में मूल कवरेज के अतिरिक्त सुविधाएं जोड़ने का विकल्प होता है, जिन्हें राइडर्स या ऐड-ऑन्स कहा जाता है। यह आपके कवरेज को विस्तार देते हैं और विशेष परिस्थितियों में सहायक होते हैं।

प्रमुख राइडर्स:

  • एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट: एक्सीडेंट में मृत्यु की स्थिति में अतिरिक्त राशि
  • क्रिटिकल इलनेस कवर: कैंसर, किडनी फेलियर जैसी गंभीर बीमारियों पर एकमुश्त राशि
  • मैटरनिटी बेनिफिट: गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी खर्चों को कवर करता है
  • पैरेंटल कवर: माता-पिता को कवरेज में शामिल करने की सुविधा

राइडर्स जोड़ने से प्रीमियम थोड़ा बढ़ता है, इसलिए इन्हें अपनी जरूरत और बजट को ध्यान में रखकर ही जोड़ें।

5. Exclusion और waiting period की जानकारी अनिवार्य है

इंश्योरेंस डॉक्युमेंट्स में अक्सर वे नियम होते हैं जिन पर ग्राहक ध्यान नहीं देता। लेकिन यही वह हिस्से होते हैं जिनके कारण बाद में क्लेम रिजेक्ट होने की संभावना सबसे अधिक होती है।

Exclusions क्या होते हैं?

  • पूर्व-विद्यमान बीमारियां (Pre-existing diseases)
  • कॉस्मेटिक सर्जरी, बाल प्रत्यारोपण जैसी नॉन-आवश्यक सर्जरी
  • मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियां (कुछ पॉलिसियों में)
  • नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाली बीमारियां

Waiting Period क्या होता है?

  • बीमा लेने के बाद कुछ बीमारियों पर क्लेम करने से पहले एक निर्धारित अवधि तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
  • उदाहरण: हर्निया, हृदय रोग, थायरॉइड जैसी बीमारियों पर सामान्यतः 2-4 वर्ष का वेटिंग पीरियड होता है।

इन नियमों की जानकारी न होने पर ग्राहक भ्रमित होता है और क्लेम रिजेक्ट होने पर विश्वास टूटता है। इसलिए पॉलिसी डॉक्युमेंट्स पढ़ना अनिवार्य है।

6. Claim Settlement Ratio (CSR) पर विशेष ध्यान दें

क्लेम सेटलमेंट रेश्यो यह बताता है कि इंश्योरेंस कंपनी ने सालभर में कितने क्लेम स्वीकार किए और कितने अस्वीकार किए। यह आंकड़ा कंपनी की विश्वसनीयता का सूचक होता है।

CSR क्यों जरूरी है?

  • यदि CSR 95% से ऊपर है, तो उस कंपनी को सुरक्षित माना जा सकता है।
  • यह इस बात का आश्वासन देता है कि किसी आपातकाल की स्थिति में आपका क्लेम नकारा नहीं जाएगा।
  • IRDAI (भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण) की वेबसाइट पर CSR की वार्षिक रिपोर्ट उपलब्ध होती है।

7. Premium और Affordability का संतुलन बनाए रखें

अक्सर लोग यह सोचकर इंश्योरेंस नहीं लेते कि इसका प्रीमियम बहुत ज्यादा होगा, लेकिन यह धारणा गलत है। उचित तुलना और सही जानकारी से आप ऐसी पॉलिसी ले सकते हैं जो न तो आपकी जेब पर बोझ डाले और न ही सुविधाओं में कटौती करे।

ध्यान रखने योग्य बातें:

  • केवल कम प्रीमियम देखकर पॉलिसी न लें, उसमें कवरेज अधूरी हो सकती है
  • बहुत अधिक प्रीमियम लेने से मासिक बजट प्रभावित होता है
  • हर साल प्रीमियम को रिव्यू करें
  • हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर प्रीमियम कम किया जा सकता है (जैसे BMI सही रखना, धूम्रपान से परहेज)

निष्कर्ष: Insurance Policy

इंश्योरेंस पॉलिसी सिर्फ एक कागज़ी दस्तावेज़ नहीं बल्कि आपके और आपके परिवार के भविष्य की सुरक्षा की गारंटी है। एक गलत निर्णय आपकी मेहनत की कमाई को जोखिम में डाल सकता है। इसलिए पॉलिसी चुनते समय जल्दबाज़ी न करें।

आपकी पॉलिसी सही तभी होगी जब:

  • आपने अपनी ज़रूरतों का स्पष्ट मूल्यांकन किया हो,
  • पॉलिसियों की तुलना की हो,
  • राइडर्स और वेटिंग पीरियड को समझा हो,
  • कंपनी का क्लेम सेटलमेंट रेश्यो जांचा हो,
  • और बजट में रहकर बेहतर कवरेज पाया हो।

याद रखें, बीमा लेने का सही समय “अब” है — क्योंकि जोखिम कभी बताकर नहीं आते।

Rohit Saini

Founder & Chief Editor, BulletinBull.com With a commitment to timely and reliable journalism, Bulletin Bull has become one of India’s most trusted digital media platforms—driven by his clear vision and strong leadership.

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