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Home Insurance और War: युद्ध में घर को नुकसान होने पर मिलेगा Insurance Claim? जानें सच्चाई

On: 17 November, 2025
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Home Insurance और War
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भारत जैसे देश में जहां कई सीमाएं युद्ध-संभावित या संवेदनशील मानी जाती हैं, वहां सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण बन जाता है-क्या युद्ध के दौरान घर को हुए नुकसान पर होम इंश्योरेंस से मुआवजा मिलेगा?

इस प्रश्न का उत्तर सीधे “हां” या “नहीं” में देना जितना आसान लगता है, असल में यह विषय उतना ही जटिल है। बीमा की शर्तें, वैश्विक प्रथाएं और कानूनी ढांचे इस पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इस लेख में हम होम इंश्योरेंस की मूल अवधारणा से लेकर युद्ध संबंधित शर्तों, अपवादों और संभावित विकल्पों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

Contents

Home Insurance क्या होता है?

होम इंश्योरेंस, जिसे गृह बीमा भी कहते हैं, एक सुरक्षा कवच है जो आपके आवासीय संपत्ति को प्राकृतिक आपदाएं (जैसे भूकंप, बाढ़), आग, चोरी, या कुछ अन्य घटनाओं से हुए नुकसान के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें आमतौर पर घर की संरचना के साथ-साथ अंदर रखी वस्तुओं का भी बीमा शामिल होता है।

लेकिन बीमा कंपनियां हर जोखिम को कवर नहीं करतीं। और जब विषय युद्ध का हो, तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है।

बीमा पॉलिसियों में ‘युद्ध’ क्या होता है?

बीमा कंपनियां “युद्ध” शब्द को विशेष कानूनी भाषा में परिभाषित करती हैं। उनके अनुसार, निम्नलिखित घटनाएं युद्ध या युद्ध-जैसी परिस्थितियों में आती हैं:

  • विदेशी आक्रमण (Foreign Invasion)
  • घोषित या अघोषित युद्ध (Declared or Undeclared War)
  • गृह युद्ध (Civil War)
  • विद्रोह, बगावत, या तख्तापलट
  • सैन्य या अर्धसैनिक बलों की कार्रवाई
  • राजनीतिक सत्ता परिवर्तन के लिए बल प्रयोग

इन सभी स्थितियों को बीमा कंपनियां “War Exclusion Clause” के अंतर्गत बाहर रखती हैं। इसका सीधा मतलब है कि अगर इनमें से किसी स्थिति में आपके घर को नुकसान होता है, तो बीमा कंपनी उसकी भरपाई नहीं करेगी।

War से हुए नुकसान को insurance policy में क्यों नहीं शामिल किया जाता?

1. जोखिम का अनुमान लगाना असंभव

बीमा कंपनियां किसी जोखिम को कवर करने से पहले उसके संभावित प्रभाव, संभावना और नुकसान का गणितीय आकलन करती हैं। लेकिन युद्ध:

  • अप्रत्याशित होता है
  • बड़े पैमाने पर तबाही लाता है
  • कब, कहां और किस हद तक फैलेगा—यह तय करना मुश्किल होता है

इसलिए बीमा कंपनियां इसे बीमा योग्य जोखिम नहीं मानतीं।

2. वैश्विक बीमा प्रथाएं

अंतरराष्ट्रीय बीमा इंडस्ट्री में भी युद्ध को बीमा से बाहर रखने की परंपरा है। चाहे वह अमेरिका, यूरोप, या एशिया हो—हर देश की बीमा कंपनियां युद्ध और संबंधित गतिविधियों को “Excluded Risk” मानती हैं। भारत की कंपनियां भी इसी नियम का पालन करती हैं।

सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वालों की चिंता: क्या हैं उनके विकल्प?

क्या War-risk cover का विकल्प है?

एविएशन (विमान) और मरीन इंश्योरेंस (जहाजों आदि) में “वॉर-रिस्क अंडरराइटिंग” एक आम प्रथा है क्योंकि ये युद्धकालीन गतिविधियों में सक्रिय होते हैं। लेकिन आम नागरिकों के घरों के लिए ऐसा कोई अलग कवर भारत में वर्तमान में उपलब्ध नहीं है।

बीमा विशेषज्ञों का मानना है कि:

“आवासीय संपत्तियों को युद्ध जोखिम से कवर करना न तो आर्थिक रूप से व्यावहारिक है, और न ही कानूनी रूप से संभव।”

Terrorist Attacks और Home Insurance

Terrorism Cover

कुछ होम इंश्योरेंस पॉलिसियों में ‘टेररिज्म कवर’ को ऐड-ऑन के रूप में शामिल किया जा सकता है। इसका मतलब है कि अगर किसी आतंकी हमले के कारण आपकी संपत्ति को नुकसान होता है, और आपने यह कवर अपनी पॉलिसी में जोड़ा है, तो आप बीमा क्लेम कर सकते हैं।

उदाहरण: अगर किसी शहर में आतंकी विस्फोट में आपका घर क्षतिग्रस्त होता है, और आपकी पॉलिसी में टेररिज्म कवर शामिल है, तो क्लेम स्वीकार किया जा सकता है।

लेकिन ध्यान रहे: अगर हमला सेना द्वारा किया गया हो या वह सैन्य संघर्ष का हिस्सा हो, तो उसे युद्ध की श्रेणी में रखा जाएगा, जिससे क्लेम खारिज किया जा सकता है।

राजनीतिक हिंसा और नागरिक दंगे: सीमित कवरेज की हकीकत

बीमा कंपनियां कभी-कभी ‘पॉलिटिकल वायलेंस कवर’ या ‘सिविल कमोशन कवर’ प्रदान करती हैं, जिनमें दंगे, फसाद, लूटपाट आदि शामिल होते हैं। हालांकि:

  • ये कवर हर पॉलिसी में नहीं होते
  • अक्सर यह ऐड-ऑन के रूप में उपलब्ध होते हैं
  • क्लेम करने के लिए दस्तावेजी प्रमाण की आवश्यकता होती है

जरूरी दस्तावेजों में शामिल हैं:

  • पुलिस रिपोर्ट (FIR)
  • क्षतिग्रस्त संपत्ति की तस्वीरें
  • नुकसान का अनुमान
  • मीडिया रिपोर्ट या सरकारी अधिसूचना

सीमावर्ती इलाकों के नागरिक क्या कदम उठाएं?

1. पॉलिसी की सावधानीपूर्वक समीक्षा करें

अपनी मौजूदा होम इंश्योरेंस पॉलिसी को ध्यान से पढ़ें:

  • किन जोखिमों को कवर किया गया है
  • कौन-कौन से अपवाद (Exclusions) हैं
  • क्या टेररिज्म या सिविल वायलेंस जैसे ऐड-ऑन शामिल हैं

2. बीमा एजेंट या प्रतिनिधि से सलाह लें

अक्सर बीमा एजेंट स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर उपयुक्त ऐड-ऑन की जानकारी दे सकते हैं। उनसे पूछें कि आपके क्षेत्र के लिए क्या बीमा विकल्प उपयुक्त हैं।

3. वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें

अनुभवी फाइनेंशियल प्लानर आपके बजट और जोखिम प्रोफाइल के अनुसार आपको बेहतर बीमा योजना सुझा सकते हैं।

4. सभी दस्तावेजों को सुरक्षित रखें

युद्ध या दंगों के बाद अगर सरकार राहत पैकेज देती है, तो इसके लिए आपको प्रमाण देने होंगे। इसलिए ये दस्तावेज संभालकर रखें:

  • घर की वर्तमान और क्षतिग्रस्त स्थिति की तस्वीरें
  • मरम्मत के खर्चों की रसीदें
  • स्थानीय प्रशासन या पुलिस द्वारा जारी रिपोर्ट
  • समाचार पत्र की कटिंग या ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट

भविष्य की संभावना: क्या भारत में युद्ध कवर वाला Home Insurance संभव है?

बीमा उद्योग के विशेषज्ञ मानते हैं कि वर्तमान कानूनी और कारोबारी ढांचे में युद्ध से हुए नुकसान को होम इंश्योरेंस में शामिल करना लगभग असंभव है।

लेकिन कुछ शर्तों के तहत यह संभव हो सकता है:

  • यदि सरकार कोई सार्वजनिक बीमा मॉडल लेकर आए
  • यदि युद्ध जोखिम को पुनर्बीमा कंपनियों द्वारा सपोर्ट मिले
  • यदि नीति निर्माताओं द्वारा विशेष बीमा उत्पादों को प्रोत्साहन मिले

निष्कर्ष: जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है

होम इंश्योरेंस एक शक्तिशाली उपकरण है, लेकिन यह हर परिस्थिति को कवर नहीं कर सकता। युद्ध जैसी स्थितियां बीमा दायरे से बाहर होती हैं, और ऐसे में आम नागरिकों के पास सीमित विकल्प होते हैं।

इसलिए जरूरी है कि आप:

  • अपनी पॉलिसी को बारीकी से पढ़ें
  • ऐड-ऑन कवर जैसे टेररिज्म या सिविल अनरेस्ट शामिल करें
  • सभी जरूरी दस्तावेज इकट्ठा और सुरक्षित रखें
  • समय-समय पर विशेषज्ञों से सलाह लें

युद्ध जैसी स्थिति में बीमा पॉलिसी भले सीधे मदद न करे, लेकिन एक व्यवस्थित तैयारी और सतर्कता आपको आर्थिक नुकसान से बचा सकती है।

सारांश

मुद्दाजानकारी
क्या युद्ध से नुकसान पर क्लेम मिलता है?नहीं, यह बीमा दायरे से बाहर होता है
टेररिज्म कवर से क्या मदद मिल सकती है?हां, अगर ऐड-ऑन के रूप में लिया गया हो
राजनीतिक हिंसा का कवरसीमित, कुछ पॉलिसियों में उपलब्ध
सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए सुझावपॉलिसी समीक्षा करें, ऐड-ऑन जोड़ें, दस्तावेज सुरक्षित रखें
सरकारी सहायतामुमकिन, लेकिन प्रमाण आवश्यक

Rohit Saini

Founder & Chief Editor, BulletinBull.com With a commitment to timely and reliable journalism, Bulletin Bull has become one of India’s most trusted digital media platforms—driven by his clear vision and strong leadership.

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