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Dollar vs Rupee Today: क्यों लगातार दबाव में है भारतीय रुपया?

On: 5 January, 2026
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Dollar vs Rupee Today
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भारतीय रूपया (INR) पिछले कुछ समय में लगातार कमजोर होता दिख रहा है। 2014 से अब तक डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर लगभग ₹90 के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि 2014 में रुपये की कीमत लगभग ₹58.6 थी। इस गिरावट ने न सिर्फ आम नागरिकों की जेब पर असर डाला है, बल्कि स्टॉक मार्केट और निवेशकों के फैसलों को भी प्रभावित किया है।

रुपया गिरने के प्रमुख कारण

1. Trade Deficit

भारत एक नेट इंपोर्ट देश है – यानी हम ज्यादा सामान विदेश से खरीदते हैं और कम बेचते हैं। खासकर पेट्रोल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कोयला और केमिकल्स जैसे बड़े इंपोर्ट से रुपए पर दबाव बनता है। जब इंपोर्ट ज्यादा और एक्सपोर्ट कम होता है, तो डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।

2. टैरिफ और एक्सपोर्ट पर असर

अमेरिका और कुछ अन्य देशों द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) का सीधा असर भारतीय एक्सपोर्ट पर पड़ा। कुछ उत्पादों के निर्यात में गिरावट के कारण विदेशी बाजार में रुपया कमजोर हुआ है।

3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FII Selling)

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय इक्विटी बाजार में भारी बिकवाली की। जब FII स्टॉक्स बेचते हैं, तो रुपये को भी बेचना होता है और डॉलर खरीदा जाता है – इससे रुपया कमजोर होता है।

क्या RBI रुपया मजबूत कर सकता है?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पास बड़े फॉरेक्स रिज़र्व हैं, जिनका इस्तेमाल वह डॉलर खरीदकर रुपये को सपोर्ट करने में कर सकता है। हालांकि इस बार RBI ने करंसी सपोर्ट में उतनी तेजी नहीं दिखाई, संभवतः क्योंकि कुछ मामलों में कमजोर रुपया राजस्व और एक्सपोर्ट को बढ़ावा भी दे सकता है।

कमजोर रुपया नुकसान या अवसर?

रुपया कमजोर होने से नेगेटिव इफेक्ट भी दिखता है, लेकिन इसके कुछ पॉजिटिव पहलू भी हैं:

नुकसान

  • डीज़ल, पेट्रोल और खाने-पीने की चीजें महँगी हो सकती हैं
  • आयातित सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं
  • एयरलाइंस और ऊर्जा सेक्टर पर दबाव बढ़ सकता है

फायदा

  • IT और फार्मा जैसे निर्यात-उन्मुख सेक्टर्स को फायदा
  • वर्कर्स की रेमिटेंस बढ़ सकती है
  • ग्लोबल मार्केट्स में भारतीय सेवा-उत्पाद प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं
  • निवेशकों को इसकी वजह से बेहतर अल्टरनेटिव निवेश अवसर

स्टॉक मार्केट पर क्या असर?

कमजोर रुपया अक्सर स्टॉक्स में नेगेटिव इफेक्ट पैदा करता है — खासकर जब विदेशी निवेशकों की बिकवाली हो। इसके बावजूद भारतीय घरेलू निवेशकों (DII) और SIP निवेशों ने बाजार को स्थिर रखा है।
आज निफ्टी और सेंसेक्स ऐसे संकेत दे रहे हैं कि लंबे समय में बाजार सकारात्मक भी दिख सकता है।

रुपया गिरने से खुद को कैसे बचाएं?

  • डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाएं
  • स्टॉक्स या म्यूचुअल फंड SIP में नियमित निवेश करें
  • गोल्ड और सिल्वर ETF या अन्य एसेट्स में अलोकेशन करें
  • ग्लोबल ETF के जरिए विश्व बाजार में निवेश फैलाएं

यह रणनीति न सिर्फ रुपया डेप्रिसिएशन के समय बचाती है, बल्कि संभावित रिटर्न को भी बेहतर बनाती है।

क्या रुपया ₹100/$ तक जा सकता है?

यह एक ऐसा सवाल है जो निवेशक और नागरिक दोनों पूछ रहे हैं। आर्थिक विशेषज्ञ कहते हैं कि रुपए की स्थिति वैश्विक, घरेलू और मौद्रिक नीतियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल ₹90/$ के आसपास ट्रेडिंग हो रही है, लेकिन भविष्य की दिशा का अनुमान बाजार की आर्थिक सूचकांकों पर आधारित होगा।

निष्कर्ष

रुपया कमजोर होना सिर्फ बुरी खबर नहीं है – इसके कारण भारतीय अर्थव्यवस्था के कुछ सकारात्मक तत्व भी दिखाई देते हैं।
महत्त्वपूर्ण यह है कि आप अपनी निवेश रणनीति को समझदारी से तैयार करें और बाजार चाल के अनुरूप निर्णय लें।

Rohit Saini

Founder & Chief Editor, BulletinBull.com With a commitment to timely and reliable journalism, Bulletin Bull has become one of India’s most trusted digital media platforms—driven by his clear vision and strong leadership.

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