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क्या आप सही Gold Investment कर रहे हैं? जानिए एक्सपर्ट टिप्स और नए निवेश नियम

On: 2 November, 2025
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क्या आप जानना चाहते हैं कि सोने में निवेश करने का सही तरीका क्या है? भारत में जब सोने की कीमत ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम (यानी ₹1 करोड़ प्रति किलो) के आसपास पहुंच रही है, तो निवेशकों के बीच यह प्रश्न तेजी से उभर रहा है कि क्या अब भी सोना खरीदना लाभकारी रहेगा? इस लेख में हम इस सवाल का गहराई से विश्लेषण करेंगे — और जानेंगे कि सोने में निवेश का सही तरीका क्या है।

भारत में Gold: सिर्फ धातु नहीं, एक परंपरा

भारत में सोना केवल एक आभूषण की तरह नहीं देखा जाता, बल्कि यह सांस्कृतिक, धार्मिक और वित्तीय दृष्टिकोण से विशेष महत्व रखता है। विवाह, त्योहार और खास अवसरों पर सोने का लेन-देन आम बात है। लेकिन समय के साथ अब सोना निवेश के एक प्रमुख साधन के रूप में उभर कर सामने आया है।

Gold में निवेश क्यों ज़रूरी है?

  • मुद्रास्फीति से सुरक्षा: सोना समय के साथ अपनी क्रय शक्ति बनाए रखता है।
  • कम जोखिम: स्टॉक मार्केट के उलट, सोना अपेक्षाकृत स्थिर रहता है।
  • आर्थिक अनिश्चितताओं में सहारा: जब बाजारों में गिरावट आती है, तब सोना अक्सर बढ़ता है।

Gold vs Stock market

एक विस्तृत अध्ययन के अनुसार, 1970 से 2025 तक भारत में सोने ने औसतन 13.3% सालाना रिटर्न दिया है। इसकी तुलना में Nifty 50 का औसत रिटर्न लगभग 12%-13% के आसपास रहा है।

उदाहरण:

  • COVID-19 (मार्च 2020): जब शेयर बाजार 38% गिरा, उसी दौरान सोना 14% तक चढ़ गया।
  • यदि 2007 से 2025 तक आप 50% Nifty और 50% Gold में निवेश करते, तो औसतन 12.3% रिटर्न मिलता और अधिकतम गिरावट केवल -34% रहती।
  • सिर्फ Nifty में निवेश करने पर अधिकतम ड्रॉडाउन -59% तक हुआ।

निष्कर्ष:

सोना एक पोर्टफोलियो बैलेंसर की भूमिका निभाता है। यह उतार-चढ़ाव से रक्षा करता है और दीर्घकालीन स्थिरता सुनिश्चित करता है।

Gold में निवेश के प्रमुख विकल्प

अब सवाल उठता है – सिर्फ आभूषण खरीदने से क्या निवेश पूरा हो जाता है? नहीं। आज के दौर में डिजिटल माध्यमों से सोने में निवेश करना अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और सुविधाजनक है। आइए जानते हैं तीन प्रमुख डिजिटल विकल्प:

1. Gold ETF (Exchange Traded Funds)

गोल्ड ETF ऐसे म्यूचुअल फंड होते हैं जो स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड होते हैं और फिजिकल गोल्ड की कीमत को ट्रैक करते हैं।

प्रमुख लाभ:

  • रियल-टाइम ट्रेडिंग: स्टॉक्स की तरह कभी भी खरीद-बेच सकते हैं।
  • कम लागत: मेकिंग चार्ज या स्टोरेज खर्च नहीं।
  • उच्च तरलता: ज़रूरत पड़ने पर तुरंत नकद किया जा सकता है।
  • पारदर्शिता: NAV और होल्डिंग्स पब्लिक होती हैं।

निवेश कैसे करें?

यदि आपके पास Demat अकाउंट है, तो आप Zerodha, Groww, Upstox जैसे प्लेटफॉर्म्स पर Nippon India Gold ETF, HDFC Gold ETF, ICICI Prudential Gold ETF आदि में निवेश कर सकते हैं।

2. Gold mutual fund

यदि आपके पास Demat अकाउंट नहीं है, तब भी आप गोल्ड में निवेश कर सकते हैं गोल्ड म्यूचुअल फंड्स के माध्यम से। ये फंड गोल्ड ETF में निवेश करते हैं।

प्रमुख लाभ:

  • SIP सुविधा: हर महीने छोटी रकम से निवेश संभव।
  • बिना Demat के: खाता खोलना आसान।
  • लंबी अवधि के लिए उपयुक्त: कम लागत और आसान सेटअप।

ध्यान देने योग्य बातें:

  • रियल-टाइम ट्रेडिंग नहीं: NAV हर दिन शाम को तय होता है, जिससे थोड़ी देरी होती है।
  • थोड़ा अधिक खर्च: ETF की तुलना में थोड़ी अधिक लागत।

3. Digital gold

डिजिटल गोल्ड आज के युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। आप ₹1 से भी निवेश की शुरुआत कर सकते हैं।

प्लेटफॉर्म्स:

  • PhonePe
  • Google Pay
  • Paytm
  • Amazon Pay

प्रमुख विशेषताएं:

  • 24 कैरेट शुद्धता: हर बार शुद्धता की गारंटी।
  • फिजिकल डिलीवरी: चाहें तो सोने को घर मंगवा सकते हैं।
  • सुरक्षित स्टोरेज: थर्ड-पार्टी वॉल्ट्स में सुरक्षित।
  • ₹1 से शुरुआत: बजट कम होने पर भी निवेश संभव।

सावधानी:

डिजिटल गोल्ड अभी तक भारतीय रिज़र्व बैंक या सेबी के तहत नियामित नहीं है। इसलिए सिर्फ मान्यता प्राप्त और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म्स से ही खरीदें।

Sovereign Gold Bonds (SGB)

SGB भारतीय सरकार द्वारा जारी किए गए बॉन्ड हैं जो डिजिटल गोल्ड से कहीं ज्यादा फायदेमंद हैं।

प्रमुख फायदे:

  • 2.5% सालाना गारंटीड ब्याज
  • 8 साल बाद टैक्स-फ्री रिडेम्प्शन
  • सरकार की गारंटी
  • बिना किसी स्टोरेज चार्ज के

वर्तमान स्थिति:

हाल के समय में सरकार ने SGB के नए इशू कम जारी किए हैं। हालांकि आप इन्हें सेकेंडरी मार्केट से खरीद सकते हैं, लेकिन वहां कीमतों में उतार-चढ़ाव और तरलता (Liquidity) की समस्या हो सकती है।

क्या करें?

यदि आपको SGB अच्छे दाम पर मिल जाएं, तो यह सबसे सुरक्षित और फायदेमंद विकल्प माना जाता है।

कितना Gold Allocationसही है?

हर निवेशक के लिए यह जानना जरूरी है कि पोर्टफोलियो में गोल्ड का प्रतिशत कितना होना चाहिए

निवेशक की स्थितिअनुशंसित गोल्ड एलोकेशन
25-35 वर्ष (युवा)5%
35-50 वर्ष (मध्यम आयु)10%
50+ वर्ष या रिटायरमेंट के पास15%–20%

उद्देश्य:

गोल्ड में निवेश करने का उद्देश्य अधिकतम रिटर्न नहीं बल्कि पोर्टफोलियो को स्थिर बनाना है।

Gold vs Stock Market

निवेश माध्यमऔसत रिटर्नजोखिम स्तरतरलताटैक्स लाभ
गोल्ड ETF~13%मध्यमउच्चनहीं
गोल्ड म्यूचुअल फंड~12-13%मध्यममध्यमनहीं
Sovereign Gold Bond~13% + 2.5% ब्याजकमकम8 साल बाद टैक्स फ्री
शेयर बाजार (Nifty)~12-13%उच्चउच्चLTCG टैक्स लागू

अंतिम निष्कर्ष: क्या आप सही तरीके से Gold में निवेश कर रहे हैं?

यदि आप आज भी सिर्फ ज्वेलरी को ही निवेश मानते हैं, तो शायद आप पीछे छूट रहे हैं। आज के निवेशकों के लिए ज़रूरी है कि:

  • डिजिटल और पारदर्शी माध्यमों का चयन करें।
  • गोल्ड को पोर्टफोलियो बैलेंसर के रूप में देखें, न कि केवल रिटर्न कमाने की दृष्टि से।
  • ETF, म्यूचुअल फंड्स, और SGBs में ही निवेश करें, ज्वेलरी नहीं।

निष्कर्ष

आज के युग में निवेश का मतलब है जानकारी के साथ समझदारी से निर्णय लेना। यदि आप अब भी सोने में पारंपरिक तरीकों से निवेश कर रहे हैं, तो यह समय है डिजिटल विकल्प अपनाने का।

याद रखें: सोना केवल आभूषण नहीं, बल्कि एक रणनीतिक निवेश है। सही माध्यम और सही रणनीति के साथ सोना आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता और संतुलन प्रदान कर सकता है।

यदि आप चाहते हैं कि आपका निवेश सुरक्षित भी हो और स्थिर भी, तो गोल्ड को नजरअंदाज करना समझदारी नहीं होगी। आज ही सही माध्यम का चयन करें और सोने में सही तरीके से निवेश करना शुरू करें।

Rohit Saini

Founder & Chief Editor, BulletinBull.com With a commitment to timely and reliable journalism, Bulletin Bull has become one of India’s most trusted digital media platforms—driven by his clear vision and strong leadership.

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