भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कैश डिपॉजिट, टैक्स रिपोर्टिंग और ITR फाइलिंग से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किए हैं। खासकर वे लोग जो नकद लेन-देन में विश्वास रखते हैं, उनके लिए यह बदलाव राहत लेकर आए हैं।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि अब आप अपने सेविंग अकाउंट में कितनी रकम तक जमा कर सकते हैं, बिना ITR फाइल किए और बिना टैक्स जमा किए, और इसके लिए आपको किन शर्तों और नियमों का पालन करना होगा।
Contents
- 1 25 लाख रुपये की Cash Deposit Limit क्यों चर्चा में है?
- 2 हर महीने 1 लाख रुपये कैश जमा करना अब संभव है?
- 3 Savings account और current account की Reporting Limits
- 4 Reporting और Tax देनदारी में अंतर समझें
- 5 Legal Source of Income: क्यों ज़रूरी है?
- 6 किन परिस्थितियों में IT विभाग जांच कर सकता है?
- 7 Post office में Cash जमा की reporting कैसे होती है?
- 8 ITR फाइल किए बिना Cash जमा करना – कब है सुरक्षित?
- 9 Cash Deposit से जुड़ी आम गलतफहमियां
- 10 क्या कहता है Income Tax Department का कानून?
- 11 आपके लिए क्या है सही और सुरक्षित तरीका?
- 12 निष्कर्ष: क्या अब Cash लेन-देन हुआ आसान?
25 लाख रुपये की Cash Deposit Limit क्यों चर्चा में है?
वित्त मंत्रालय के हालिया दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि आपकी सालाना इनकम ₹12 लाख या आपकी सैलरी ₹12.75 लाख तक है, तो आप वित्त वर्ष 2025-26 में 25 लाख रुपये तक की नकद राशि अपने सेविंग अकाउंट में बिना टैक्स और बिना ITR फाइल किए जमा कर सकते हैं।
इस नए प्रावधान का उद्देश्य उन लोगों को राहत देना है जो फॉर्मल बैंकिंग सिस्टम में आना चाहते हैं लेकिन ITR फाइलिंग या टैक्स भुगतान से डरते हैं।
हर महीने 1 लाख रुपये कैश जमा करना अब संभव है?
यह सवाल बहुत से लोगों के मन में है – “क्या अब हर महीने ₹1 लाख तक सेविंग अकाउंट में कैश डिपॉजिट किया जा सकता है?”
उत्तर है – हां, लेकिन सीमित शर्तों के साथ।
- यदि आप पूरे साल में कुल मिलाकर 25 लाख रुपये तक कैश जमा करते हैं, और आपकी आय ₹12 लाख से अधिक नहीं है, तो आपको टैक्स या ITR की आवश्यकता नहीं है।
- हालांकि, बैंक आपके अकाउंट में लगातार हो रहे कैश ट्रांजैक्शन पर नजर रखता है और संदेह होने पर रिपोर्ट कर सकता है।
Savings account और current account की Reporting Limits
Savings account की Reporting Limits
बैंकों के लिए यह अनिवार्य है कि यदि किसी ग्राहक ने एक वित्तीय वर्ष में ₹10 लाख या उससे अधिक कैश जमा या निकासी की है, तो उसकी जानकारी आयकर विभाग (Income Tax Department) को दी जाए।
यह रिपोर्टिंग आपकी सभी सेविंग अकाउंट्स को मिलाकर की जाती है। उदाहरण के लिए:
अगर आपके तीन अलग-अलग बैंकों में सेविंग अकाउंट हैं और उन सभी में कुल मिलाकर 10 लाख रुपये कैश जमा हुआ है, तो यह रिपोर्टिंग के दायरे में आएगा।
Current account की Reporting Limits
करंट अकाउंट में कैश लेन-देन की रिपोर्टिंग सीमा अधिक है:
- यदि आपने एक वित्तीय वर्ष में ₹50 लाख या उससे अधिक कैश जमा किया है, तो बैंक इसकी सूचना आयकर विभाग को देगा।
महत्वपूर्ण बात:
रिपोर्टिंग का अर्थ टैक्स देना नहीं होता। यदि आपकी इनकम वैध है और टैक्स नियमों के तहत आती है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं।
Reporting और Tax देनदारी में अंतर समझें
कई लोगों को यह गलतफहमी होती है कि अगर बैंक ने किसी ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट की तो उन्हें टैक्स देना पड़ेगा।
सच्चाई यह है:
- बैंक सिर्फ सूचना भेजता है।
- आयकर विभाग उस सूचना के आधार पर जांच करता है।
- अगर आपकी आय घोषित नहीं है, या आपने टैक्स नहीं दिया है, तभी कार्रवाई हो सकती है।
यदि आपकी आमदनी पारदर्शी और वैध है, तो रिपोर्टिंग से डरने की आवश्यकता नहीं है।
Legal Source of Income: क्यों ज़रूरी है?
जब आप बड़ी रकम नकद जमा करते हैं, तो बैंक आपसे पूछ सकता है कि यह पैसा कहां से आया। इसे लीगल सोर्स ऑफ इनकम कहा जाता है।
उदाहरण:
मान लीजिए आपने एक प्रॉपर्टी बेची जिसकी डील ₹2 करोड़ में हुई। आप बैंक को सिर्फ ₹1 करोड़ बैंक ट्रांसफर से देते हैं और ₹1 करोड़ कैश लेते हैं। यदि आप वह कैश बैंक में जमा करते हैं, तो बैंक आपसे उसका स्रोत पूछ सकता है।
यदि आप उसे साबित कर सकते हैं – जैसे:
- प्रॉपर्टी डील का दस्तावेज़
- सेल डीड
- टैक्स भुगतान की रसीद
तो आपका लेन-देन वैध माना जाएगा। यदि नहीं, तो यह संदिग्ध हो सकता है।
किन परिस्थितियों में IT विभाग जांच कर सकता है?
जांच तब शुरू हो सकती है जब:
- आपने एक साथ ₹7 लाख या उससे अधिक कैश जमा किया हो।
- पूरे साल में ₹25 लाख से अधिक कैश जमा किया गया हो, लेकिन आपकी आय उसके अनुरूप नहीं हो।
- आपने ITR फाइल नहीं किया हो या जानकारी में गड़बड़ी हो।
संभावित कार्रवाई:
- बैंक द्वारा संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्टिंग (STR) करना।
- IT विभाग द्वारा नोटिस भेजा जाना।
- फिजिकल इन्वेस्टिगेशन या एफआईआर दर्ज की जा सकती है।
Post office में Cash जमा की reporting कैसे होती है?
हालांकि पोस्ट ऑफिस में करंट अकाउंट की सुविधा नहीं होती, लेकिन वहां भी सेविंग अकाउंट में ₹10 लाख या उससे अधिक कैश जमा किया जाता है, तो वह भी आयकर विभाग को रिपोर्ट किया जाता है।
ITR फाइल किए बिना Cash जमा करना – कब है सुरक्षित?
यदि आपकी सालाना आय ₹12 लाख से कम है, और आप पूरे वर्ष में अधिकतम ₹25 लाख तक कैश जमा करते हैं, तो आप ITR फाइल किए बिना भी यह कर सकते हैं।
लेकिन सावधानी ज़रूरी है:
- यदि आप बार-बार बड़ी राशि जमा कर रहे हैं, तो बैंक आपसे स्पष्टीकरण मांग सकता है।
- आय के स्रोत का प्रमाण रखना आवश्यक है।
- ITR फाइल करना हमेशा बेहतर विकल्प होता है, खासकर तब जब आप वित्तीय रूप से पारदर्शी रहना चाहते हैं।
Cash Deposit से जुड़ी आम गलतफहमियां
गलतफहमी 1: हर महीने ₹1 लाख जमा करना पूरी तरह से सुरक्षित है
हकीकत:
जब तक आपकी आय वैध है और रिपोर्टिंग सीमा का पालन होता है, तब तक यह संभव है। लेकिन बार-बार की गई बड़ी जमा रिपोर्टिंग को आकर्षित कर सकती है।
गलतफहमी 2: Bank को Cash जमा करने की कोई परवाह नहीं होती
हकीकत:
बैंक की Core Banking Monitoring System हर बड़ी ट्रांजैक्शन को ट्रैक करता है। संदेह होने पर वह संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्ट भेज सकता है।
क्या कहता है Income Tax Department का कानून?
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 285BA और नियम 114E के अंतर्गत, बैंक, NBFC, पोस्ट ऑफिस आदि को कुछ निश्चित ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट सरकार को देना अनिवार्य होता है। यह सूचना Statement of Financial Transaction (SFT) के रूप में जाती है।
इन ट्रांजैक्शनों में शामिल हैं:
- सेविंग अकाउंट में ₹10 लाख से अधिक जमा
- करंट अकाउंट में ₹50 लाख से अधिक जमा
- फिक्स्ड डिपॉजिट, प्रॉपर्टी खरीद-फरोख्त, क्रेडिट कार्ड बिल इत्यादि
आपके लिए क्या है सही और सुरक्षित तरीका?
| स्थिति | सलाह |
|---|---|
| आपकी आय ₹12 लाख से कम है | सालाना ₹25 लाख तक कैश जमा करना संभव |
| आपकी आय ₹12 लाख से अधिक है | ITR फाइलिंग अनिवार्य |
| आप नियमित रूप से बड़ी रकम जमा करते हैं | आय के स्रोत की डिटेल और दस्तावेज रखें |
| आपका व्यवसाय नकद आधारित है | टैक्स नियमों का पालन करें, व्यवसायिक दस्तावेज अपडेट रखें |
निष्कर्ष: क्या अब Cash लेन-देन हुआ आसान?
25 लाख कैश डिपॉजिट लिमिट का यह नया नियम, वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह उन लोगों को बैंकिंग व्यवस्था में लाने का प्रयास है जो अभी तक फॉर्मल सिस्टम से बाहर थे।
लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि:
- आप आय के स्रोत को स्पष्ट रखें।
- टैक्स नियमों का पालन करें।
- समय पर ITR फाइल करें।
याद रखें:
सरकार की छूट का लाभ तभी लें जब आप वैध इनकम दिखा सकते हैं। किसी भी अवैध या अघोषित नकद लेन-देन से बचें। पारदर्शी और नियमों के अनुरूप वित्तीय व्यवहार ही लंबे समय में सुरक्षित रहते हैं।
अंतिम सुझाव:
टैक्स नियमों का पालन करना आपकी जिम्मेदारी है। सरकारी छूटों का लाभ उठाएं, लेकिन पारदर्शिता बनाए रखें। क्योंकि सही वित्तीय आचरण ही आपके आर्थिक भविष्य की सुरक्षा की गारंटी है।















