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Rental Income पर Tax कैसे घटाएं? जानिए कानूनी तरीके और जरूरी Tax नियम

On: 3 November, 2025
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Rental Income पर Tax कैसे घटाएं?
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भारत में रियल एस्टेट में निवेश करना न केवल सुरक्षित माना जाता है बल्कि यह नियमित आय का एक भरोसेमंद साधन भी है। खासकर जब आप अपनी प्रॉपर्टी को किराए पर देते हैं, तो इससे होने वाली Rental Income आपकी मासिक आमदनी में इजाफा करती है। लेकिन जहां कमाई होती है, वहां कर यानी टैक्स भी देना होता है। यही कारण है कि मकान मालिकों के मन में यह सवाल उठता है — “रेंटल इनकम पर टैक्स का बोझ कैसे कम करें?”

इस विस्तृत हिंदी लेख में हम रेंटल इनकम से जुड़े सभी प्रमुख टैक्स प्रावधानों, छूटों, और कानूनी उपायों को विस्तार से समझेंगे। यह लेख SEO फ्रेंडली और Google Discover के लिए उपयुक्त तरीके से तैयार किया गया है ताकि आपको हर जरूरी जानकारी विश्वसनीय और सहज भाषा में मिले।

Rental Income क्या है?

रेंटल इनकम वह आय होती है जो किसी व्यक्ति को उसकी अचल संपत्ति (residential, commercial या industrial) को किराए पर देने के बदले प्राप्त होती है। भारतीय आयकर कानूनों के तहत इस प्रकार की आय को “Income from House Property” की श्रेणी में रखा गया है।

Rental Income पर Tax क्यों देना होता है?

आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, रेंटल इनकम को भी आपकी नियमित आय का हिस्सा माना जाता है। यदि आपकी कुल सालाना आय — जिसमें वेतन, रेंटल इनकम और अन्य स्रोतों से प्राप्त आमदनी शामिल हो — निर्धारित टैक्स सीमा से अधिक है, तो आपको उस पर टैक्स देना अनिवार्य है।

हालांकि, आयकर अधिनियम में कुछ ऐसे प्रावधान मौजूद हैं जो आपको टैक्स बचाने में मदद कर सकते हैं — वह भी पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी तरीके से।

Rental Income पर Tax कम करने के कानूनी उपाय

नीचे दिए गए उपायों को अपनाकर आप अपनी टैक्स देनदारी (Tax Liability) को घटा सकते हैं:

1. standard deduction (Section 24A के तहत)

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 24A के अनुसार, आपको किराए से होने वाली नेट इनकम पर 30% की Standard Deduction मिलती है।

उदाहरण:
यदि आपकी प्रॉपर्टी से ₹5 लाख सालाना किराया प्राप्त हो रहा है, तो ₹1.5 लाख (30%) की राशि टैक्स से स्वतः छूट जाएगी। यह कटौती मेंटेनेंस, मरम्मत और संचालन लागतों की भरपाई के लिए मानी जाती है।

2. Municipal tax deduction

प्रॉपर्टी पर अगर आपने नगर निगम या नगरपालिका को म्युनिसिपल टैक्स का भुगतान किया है, तो वह राशि आप अपनी Gross Annual Value (GAV) से घटा सकते हैं।

शर्तें:

  • भुगतान प्रॉपर्टी मालिक द्वारा किया गया हो
  • रसीद और दस्तावेज उपलब्ध हों
  • कटौती केवल उसी वर्ष मान्य होगी जिसमें भुगतान हुआ हो

3. Vacancy period benefits

यदि आपकी प्रॉपर्टी साल के किसी हिस्से में किरायेदार न मिलने के कारण खाली रही, तो उस अवधि को Vacancy Period माना जाएगा। इस दौरान प्रॉपर्टी से कोई आमदनी न होने पर Gross Annual Value को घटाया जा सकता है।

यह छूट मेट्रो शहरों और बड़े कस्बों में रहने वाले मकान मालिकों के लिए बेहद उपयोगी है।

4. Tax savings through co-ownership

अगर कोई प्रॉपर्टी दो या अधिक व्यक्तियों के नाम पर है, जैसे पति-पत्नी के नाम, तो प्रत्येक को अपने हिस्से की रेंटल इनकम पर ही टैक्स देना होता है।

उदाहरण:
₹6 लाख की रेंटल इनकम को पति-पत्नी में बराबर बांटने पर, दोनों की टैक्स देनदारी अलग-अलग गणना होगी और छूट सीमा का भरपूर लाभ मिलेगा।

5. Discounts on home loans (Section 80C और 24B)

अगर रेंट पर दी गई प्रॉपर्टी पर होम लोन लिया गया है, तो:

  • Section 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है (प्रिंसिपल रीपेमेंट पर)
  • Section 24(b) के तहत ₹2 लाख तक की छूट मिलती है (होम लोन ब्याज पर)

कुल टैक्स बचत = ₹3.5 लाख तक

6. commercial property पर Depreciation का लाभ

यदि आपने कोई Commercial Property किराए पर दी है और उसे किसी व्यवसाय में उपयोग कर रहे हैं, तो आप उसकी मूल्य में गिरावट (Depreciation) को खर्च के रूप में दर्शा सकते हैं। यह खर्च आपकी टैक्स योग्य आय को घटाता है।

7. Contractual Expenses को दिखाना

किराए पर देने से पहले यदि आपने प्रॉपर्टी में कोई सुधार कार्य जैसे पेंटिंग, फर्नीचर, फिटिंग, रिनोवेशन आदि किया है, तो इन खर्चों को Business Expense के रूप में दिखाया जा सकता है — खासकर तब जब किराया व्यवसायिक स्तर पर लिया जा रहा हो।

8. Reduce housing society charges too

यदि मकान मालिक हाउसिंग सोसाइटी के मेंटेनेंस चार्जेस खुद वहन कर रहे हैं और किरायेदार से नहीं ले रहे, तो उन्हें भी रेंटल इनकम से घटाया जा सकता है।

9. HRA छूट (Section 10(13A))

यदि आप किसी दूसरे शहर में किराए पर रहते हैं और आपकी खुद की प्रॉपर्टी किराए पर दी गई है, तो आप HRA छूट का दावा कर सकते हैं — बशर्ते आपका एंप्लॉयर आपको HRA देता हो और सभी दस्तावेज़ सही हों।

10. Rent agreement and banking documentation

कानूनी तौर पर टैक्स छूट प्राप्त करने के लिए कुछ डॉक्युमेंटेशन अनिवार्य हैं:

  • लिखित Rent Agreement
  • किराया बैंक ट्रांसफर के ज़रिए प्राप्त हो
  • म्युनिसिपल टैक्स की रसीदें

डॉक्युमेंटेशन के अभाव में टैक्स छूट पर सवाल उठ सकता है।

Common myths about rental income and their answers

Myth: खाली प्रॉपर्टी पर टैक्स नहीं लगता

सच्चाई: अगर वह प्रॉपर्टी बाजार में किराए के योग्य है, लेकिन खाली रखी गई है, तो आयकर विभाग Notional Rent के आधार पर टैक्स ले सकता है।

अतिरिक्त Tax बचत टिप्स

सुझावलाभ
संयुक्त रूप से प्रॉपर्टी खरीदेंटैक्स लोड बंटता है, छूट बढ़ती है
किराया बैंक से लेंरेकॉर्ड प्रामाणिक होता है
पुरानी प्रॉपर्टी को रिनोवेट करेंकमर्शियल यूज़ में अधिक छूट मिलती है
टैक्स कंसल्टेंट की मदद लेंसही रणनीति से अधिक छूट संभव

निष्कर्ष:

रेंटल इनकम पर टैक्स देना आवश्यक है, लेकिन इसके बोझ को आप पूरी तरह कानूनी और प्रभावी तरीकों से कम कर सकते हैं। ऊपर बताए गए उपाय — जैसे स्टैंडर्ड डिडक्शन, म्युनिसिपल टैक्स की छूट, होम लोन बेनिफिट, और Co-ownership — का उचित उपयोग कर आप अपनी टैक्स देनदारी को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।

याद रखें, दस्तावेजों की वैधता और पारदर्शिता सबसे अहम होती है। आयकर कानून समय-समय पर बदलते रहते हैं, इसलिए हमेशा अपडेट रहना जरूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या खाली पड़ी प्रॉपर्टी पर भी Tax देना पड़ता है?

हां, अगर वह प्रॉपर्टी किराए पर दी जा सकती थी लेकिन आपने उसे जानबूझकर खाली रखा है, तो आयकर विभाग उस पर अनुमानित किराया (Notional Rent) के आधार पर Tax वसूल सकता है।

Q2. क्या किरायेदार को भी Tax देना पड़ता है?

नहीं, किराया देने वाले (किरायेदार) पर कोई Tax नहीं लगता। Tax की जिम्मेदारी केवल प्रॉपर्टी के मालिक की होती है।

Q3. क्या rental incomeपर TDS कटता है?

हां, यदि किसी व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को ₹50,000 प्रति माह से अधिक किराया दिया जा रहा है, तो सेक्शन 194-IB के तहत 5% TDS कटता है।

Q4. क्या Property पर Home Loan होने से Tax में छूट मिलती है?

हां, सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख और सेक्शन 24(b) के तहत ₹2 लाख तक की छूट मिल सकती है।

Q5. क्या Co-ownership में Tax कम देना पड़ता है?

हां, यदि एक से अधिक व्यक्ति मिलकर प्रॉपर्टी के मालिक हैं, तो प्रत्येक व्यक्ति अपने हिस्से की इनकम पर Tax देगा, जिससे कुल टैक्स लायबिलिटी कम हो जाती है।

यदि आप रियल एस्टेट से मिलने वाली आमदनी का अधिकतम लाभ उठाना चाहते हैं और टैक्स का बोझ न्यूनतम करना चाहते हैं, तो tax planning, सही दस्तावेज, और विशेषज्ञ सलाह का सहारा अवश्य लें।

Rohit Saini

Founder & Chief Editor, BulletinBull.com With a commitment to timely and reliable journalism, Bulletin Bull has become one of India’s most trusted digital media platforms—driven by his clear vision and strong leadership.

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