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SIP में नुकसान क्यों होता है? जानिए compounding returns के पीछे की सच्चाई और बचाव के उपाय

On: 7 November, 2025
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sip compounding returns
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SIP, यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान, को भारत में सबसे प्रभावी और अनुशासित निवेश विकल्पों में से एक माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी है — कंपाउंडिंग रिटर्न। यह निवेशकों को नियमित रूप से छोटी-छोटी रकम निवेश करने की सुविधा देता है, जो समय के साथ मिलकर एक बड़ा फंड तैयार करती है।

लेकिन हाल के वर्षों में कई SIP निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा क्यों हो रहा है? क्या कंपाउंडिंग की यह जादुई प्रक्रिया फेल हो रही है या फिर निवेशकों से कोई रणनीतिक चूक हो रही है?

इस लेख में हम समझेंगे कि SIP में घाटा क्यों होता है, कंपाउंडिंग रिटर्न कैसे प्रभावित होता है, और कैसे आप अपने SIP निवेश को फिर से लाभ में ला सकते हैं। साथ ही, हम यह भी जानेंगे कि सही फंड चयन, धैर्य और दीर्घकालिक रणनीति आपके निवेश को कैसे सफल बना सकती है।

Compounding Returns: SIP का मूल सिद्धांत

कंपाउंडिंग रिटर्न का अर्थ है ब्याज पर ब्याज। यानी, आप जितना निवेश करते हैं, उस पर मिलने वाला लाभ भी फिर निवेश में जुड़ जाता है, और उस पर अगली बार फिर से रिटर्न मिलता है। यह प्रक्रिया समय के साथ तेजी से बढ़ती जाती है।

SIP में कंपाउंडिंग रिटर्न इसलिए प्रभावी है क्योंकि:

  • निवेश छोटे-छोटे हिस्सों में नियमित रूप से होता है।
  • लंबी अवधि तक निवेश करने से बाजार की अस्थिरता का असर कम हो जाता है।
  • औसत लागत का लाभ मिलता है (rupee cost averaging)।

लेकिन कंपाउंडिंग तभी फायदेमंद है जब निवेश लगातार और दीर्घकालिक हो। यदि बीच में बाधा आए या गलत फंड में निवेश हो, तो कंपाउंडिंग का असर कमजोर हो जाता है और नुकसान की स्थिति बन सकती है।

SIP में नुकसान: मुख्य कारण

1. बाजार में अस्थिरता और गिरावट

SIP, खासकर इक्विटी आधारित योजनाएं, शेयर बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर होती हैं। अगर आपने निवेश की शुरुआत किसी तेजी के दौर में की और फिर बाजार में मंदी आ गई, तो आपके यूनिट्स की कीमत घट सकती है। इससे पोर्टफोलियो में अस्थायी नुकसान दिखने लगता है।

2. गलत Fund का चयन

सिर्फ पिछला रिटर्न देखकर फंड चुनना एक आम गलती है। हर फंड का प्रदर्शन समय के साथ बदलता है, और उसकी सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है:

  • पोर्टफोलियो में मौजूद कंपनियों का प्रदर्शन
  • फंड मैनेजर की रणनीति
  • मार्केट कैप के हिसाब से फंड का वर्गीकरण

3. लघु अवधि का नजरिया

SIP एक लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट टूल है। अगर आप 1-2 साल में ही रिटर्न की उम्मीद करने लगते हैं या हल्का घाटा देखकर निवेश बंद कर देते हैं, तो कंपाउंडिंग का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।

4. अधिक रिटर्न की उम्मीद

नए निवेशक अक्सर मार्केट प्रचार या सोशल मीडिया से प्रेरित होकर SIP शुरू करते हैं, और पहले कुछ महीनों में ही हाई रिटर्न की अपेक्षा करते हैं। जब ऐसा नहीं होता, तो वे घबरा जाते हैं।

नए निवेशकों की घबराहट: एक बड़ी चुनौती

अक्सर देखा गया है कि जो निवेशक हाल ही में SIP से जुड़े हैं, वे बाजार की अस्थिरता से जल्दी घबरा जाते हैं। शुरूआती नुकसान देखकर वे अपनी SIP रोक देते हैं या निकासी कर लेते हैं। इससे:

  • कंपाउंडिंग की प्रक्रिया टूट जाती है
  • औसत लागत का लाभ नहीं मिल पाता
  • निवेश लक्ष्य अधूरा रह जाता है

याद रखें, SIP कोई तात्कालिक रिटर्न वाला स्कीम नहीं है। यह समय के साथ धीरे-धीरे बड़ा बनने वाला फंड है।

क्या करें जब SIP में लगातार नुकसान हो रहा हो?

1. बाजार की चाल को समझें

बाजार हर समय एक जैसा नहीं चलता। मंदी के दौर में SIP से नुकसान होना आम बात है। लेकिन यही समय सस्ते यूनिट्स खरीदने का भी होता है। लॉन्ग टर्म नजरिया बनाए रखें और SIP जारी रखें।

2. निवेश का उद्देश्य स्पष्ट करें

हर SIP किसी लक्ष्य से जुड़ा होना चाहिए — जैसे:

  • रिटायरमेंट प्लानिंग
  • बच्चों की शिक्षा
  • घर खरीदना
  • वैवाहिक खर्च

अगर उद्देश्य स्पष्ट होगा तो अस्थायी घाटे से प्रभावित हुए बिना आप निवेश जारी रख पाएंगे।

3. portfolio की समीक्षा करें

हर 6 महीने या साल भर में एक बार अपने SIP पोर्टफोलियो की समीक्षा जरूर करें:

  • कौन-से फंड लगातार कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं?
  • क्या वे अपने बेंचमार्क से नीचे चल रहे हैं?
  • क्या कोई नया बेहतर फंड विकल्प उपलब्ध है?

जरूरत पड़ने पर फंड में बदलाव करें, लेकिन SIP को पूरी तरह से बंद न करें।

4. SIP बंद करने से बचें

अगर SIP में नुकसान हो रहा हो तो सबसे बड़ी गलती उसे बंद कर देना है। आप चाहें तो राशि घटा सकते हैं, या कुछ समय के लिए होल्ड पर रख सकते हैं, लेकिन नियमित निवेश को पूरी तरह से रोकना नुकसानदायक हो सकता है।

SIP से compounding returns पाने के लिए जरूरी रणनीतियां

1. long term investment की सोच

SIP का असली लाभ तब मिलता है जब आप कम से कम 7-10 साल तक निवेश बनाए रखें। कंपाउंडिंग समय के साथ ही अपना प्रभाव दिखाती है।

2. सही Fund चयन

फंड के पिछले प्रदर्शन के अलावा निम्नलिखित कारकों को भी देखें:

  • फंड मैनेजर का अनुभव
  • एक्सपेंस रेशियो
  • पोर्टफोलियो विविधता
  • निवेश शैली (Active vs Passive)

लार्ज कैप, मिड कैप, इंडेक्स फंड आदि का संतुलन बनाएं।

3. अनुशासित निवेश

हर महीने की निश्चित तारीख पर निवेश करें। SIP मिस न करें। यही अनुशासन कंपाउंडिंग को प्रभावी बनाता है।

4. स्टैगर निवेश अपनाएं

अगर बाजार में गिरावट की संभावना है तो एकमुश्त निवेश की बजाय SIP जैसे स्टैगर इन्वेस्टमेंट टूल्स को प्राथमिकता दें।

SIP रोकना: कब सही, कब गलत?

बाजार गिरने पर SIP रोकना एक आम लेकिन गलत कदम होता है। गिरावट के समय कम दाम पर यूनिट्स खरीदने का अवसर मिलता है, जो भविष्य में अच्छा रिटर्न देता है।

SIP रोकने के नुकसान:

  • कंपाउंडिंग टूट जाती है
  • फाइनेंशियल गोल्स अधूरे रह जाते हैं
  • तेजी के दौर में निवेश का लाभ नहीं मिल पाता

Financial Advisor की भूमिका

अगर आपको SIP फंड का चुनाव करना कठिन लग रहा है या घाटे से परेशान हैं, तो किसी प्रमाणित फाइनेंशियल प्लानर की मदद लें। वह आपकी जोखिम क्षमता, लक्ष्यों और निवेश अवधि को समझकर उचित SIP पोर्टफोलियो तैयार कर सकता है।

SIP में नुकसान: एक वास्तविक उदाहरण

मान लीजिए आपने ₹10,000 प्रति माह SIP के जरिए 5 साल तक निवेश किया। पहले 2 साल बाजार तेजी में रहा और आपको लगभग 12% रिटर्न मिला। लेकिन फिर बाजार में गिरावट आ गई और अगले 3 सालों तक रिटर्न नकारात्मक हो गया।

अगर आप इस घाटे से घबरा कर SIP बंद कर देते हैं, तो आपका निवेश अधूरा रह जाएगा और कंपाउंडिंग वहीं रुक जाएगी। लेकिन अगर आप SIP जारी रखते हैं, तो बाजार में रिकवरी के बाद पोर्टफोलियो फिर से लाभ में आ सकता है।

निष्कर्ष: SIP में compounding returns पाने का मंत्र

  • SIP में धैर्य सबसे बड़ी संपत्ति है।
  • बाजार की गिरावट में निवेश का अवसर छुपा होता है।
  • सही फंड का चुनाव और समय-समय पर समीक्षा जरूरी है।
  • निवेश को फाइनेंशियल गोल्स से जोड़ना अनिवार्य है।
  • SIP को पूरी तरह बंद करना अंतिम उपाय होना चाहिए।

SIP कोई चमत्कारी योजना नहीं है जो रातों-रात अमीर बना दे। यह एक अनुशासित, रणनीतिक और दीर्घकालिक निवेश का माध्यम है। यदि आपके SIP पोर्टफोलियो में फिलहाल नुकसान हो रहा है, तो घबराने की जगह रणनीति पर ध्यान दें। धैर्य, विवेक और नियमित निवेश से आप भविष्य में अपने वित्तीय लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

Rohit Saini

Founder & Chief Editor, BulletinBull.com With a commitment to timely and reliable journalism, Bulletin Bull has become one of India’s most trusted digital media platforms—driven by his clear vision and strong leadership.

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