आज के समय में जब हर निवेशक सुरक्षा और स्थिर रिटर्न की तलाश में रहता है, तब फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक प्रमुख विकल्प बनकर उभरा है। बैंक या वित्तीय संस्थानों में FD कराने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए यह एक भरोसेमंद निवेश साधन है। हालांकि, जब बात इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आती है, तो अधिकतर लोग FD से मिलने वाली ब्याज आय को लेकर अनभिज्ञ या लापरवाह नजर आते हैं। यह छोटी सी चूक बाद में टैक्स नोटिस या पेनल्टी का कारण बन सकती है।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि FD पर मिलने वाले ब्याज को ITR में कैसे दर्शाना चाहिए, इससे जुड़ी टैक्स की महत्वपूर्ण बातें, आम गलतियां और उनसे कैसे बचा जा सकता है।
Contents
- 1 Fixed Deposit (FD) and Tax:
- 2 FD ब्याज की गणना कैसे होती है?
- 3 FD ब्याज ITR में कहां और कैसे दिखाएं?
- 4 FD ब्याज को लेकर होने वाली आम गलतियां और उनसे बचाव
- 5 Form 15G और Form 15H: क्या, कब और क्यों?
- 6 क्या FD आज भी अच्छा निवेश विकल्प है?
- 7 FD पर टैक्स छूट कैसे पाएं?
- 8 निष्कर्ष: FD ब्याज को नजरअंदाज करना न पड़े भारी
Fixed Deposit (FD) and Tax:
FD एक ऐसा निवेश है जहां निवेशक एक तय समय के लिए एक निश्चित राशि बैंक में जमा करता है और उस पर निश्चित ब्याज अर्जित करता है। यह ब्याज आय पूरी तरह टैक्सेबल होती है, भले ही आपने वह राशि निकाली हो या नहीं।
Tax rules on FD interest
- FD से अर्जित ब्याज आपकी कुल आय में जोड़ा जाता है और उस पर आपकी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है।
- यदि किसी वित्तीय वर्ष में आपकी कुल FD ब्याज आय ₹40,000 (सीनियर सिटीजन के लिए ₹50,000) से अधिक है, तो बैंक TDS (Tax Deducted at Source) काटता है।
- यदि आपकी कुल आय टैक्स स्लैब से नीचे है, तो आप TDS रिफंड क्लेम कर सकते हैं।
FD ब्याज की गणना कैसे होती है?
FD पर मिलने वाला ब्याज मुख्यतः दो बातों पर निर्भर करता है:
- ब्याज दर (Interest Rate) – बैंक द्वारा तय की जाती है।
- अवधि (Tenure) – जितनी अधिक अवधि, उतना अधिक कंपाउंडिंग लाभ।
Interest payment के दो प्रकार
1. Payout FD
- मासिक, तिमाही या वार्षिक आधार पर ब्याज भुगतान।
- निवेशक को नियमित अंतराल पर इनकम मिलती है।
उदाहरण: ₹1 लाख की FD पर 7% वार्षिक ब्याज दर के अनुसार हर तिमाही ₹1,750 ब्याज मिलेगा। वर्षभर में कुल ₹7,000।
2. Cumulative FD (कंपाउंडिंग विकल्प)
- ब्याज हर साल FD में जुड़ता जाता है और अंत में एकमुश्त राशि मिलती है।
उदाहरण: ₹1 लाख की FD पर 7% ब्याज दर के तहत साल भर बाद मैच्योरिटी राशि ₹1,07,000 होगी।
दोनों ही स्थितियों में ₹7,000 ब्याज आपकी सालाना टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाएगा।
FD ब्याज ITR में कहां और कैसे दिखाएं?
FD से प्राप्त ब्याज को सही स्थान पर दिखाना बेहद जरूरी है, ताकि टैक्स विभाग से किसी तरह का नोटिस न आए।
किस फॉर्म में दाखिल करें?
- ITR-1: यदि आप वेतनभोगी हैं और अन्य स्रोतों से आय सीमित है।
- Schedule OS (Other Sources): यहां FD ब्याज को दर्ज करना होता है।
किस सेक्शन में जानकारी देनी है?
- Schedule TDS में उस TDS को दिखाएं जो बैंक ने FD ब्याज पर काटा है।
- Form 26AS या AIS से उस TDS को जरूर क्रॉस चेक करें ताकि डेटा में कोई अंतर न रहे।
FD ब्याज को लेकर होने वाली आम गलतियां और उनसे बचाव
1. Form 26AS या AIS से मिलान नहीं करना
बैंक द्वारा काटा गया TDS अगर आपने ITR में नहीं जोड़ा, तो आय और टैक्स में Mismatch हो सकता है, जिससे विभाग नोटिस भेज सकता है।
2. Cumulative FD की गलत रिपोर्टिंग
बहुत से निवेशक यह मानते हैं कि ब्याज तभी टैक्सेबल होगा जब FD मैच्योर होगी, लेकिन वास्तव में हर वर्ष अर्जित ब्याज को उस साल की इनकम में दिखाना अनिवार्य है।
3. पेआउट की गलत डेट
मान लीजिए आपको FD पर आखिरी बार 15 मार्च को ब्याज मिला, लेकिन फाइनेंशियल ईयर 31 मार्च को खत्म होता है। ऐसे में 16 दिन का और ब्याज बना होगा जिसे लोग अक्सर छोड़ देते हैं।
Form 15G और Form 15H: क्या, कब और क्यों?
यदि आपकी कुल टैक्सेबल इनकम टैक्स स्लैब से नीचे आती है, तो आप बैंक को फॉर्म 15G या 15H दे सकते हैं ताकि बैंक TDS न काटे।
| फॉर्म | कौन भर सकता है |
|---|---|
| Form 15G | 60 वर्ष से कम उम्र वाले व्यक्ति |
| Form 15H | 60 वर्ष या अधिक उम्र के सीनियर सिटीजन |
महत्वपूर्ण: यह फॉर्म हर वित्तीय वर्ष के आरंभ में देना चाहिए ताकि अनावश्यक TDS से बचा जा सके।
क्या FD आज भी अच्छा निवेश विकल्प है?
हालांकि आज के दौर में म्यूचुअल फंड, SIP, और शेयर बाजार जैसे विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, परंतु FD अब भी कम जोखिम और निश्चित रिटर्न चाहने वालों के लिए उपयुक्त है।
FD किसके लिए उपयुक्त है?
- जो निवेशक निश्चित रिटर्न चाहते हैं।
- सीनियर सिटीजन, जिन्हें मासिक इनकम की आवश्यकता है।
- जिनकी आय टैक्स स्लैब के अंतर्गत नहीं आती।
- जो कम जोखिम उठाना चाहते हैं।
मौजूदा ब्याज दरें
वर्तमान में बैंक 6.5% से 7.5% के बीच ब्याज दर ऑफर कर रहे हैं। हालांकि ये दरें म्यूचुअल फंड्स की तुलना में कम हैं, पर जोखिम शून्य के बराबर है।
FD पर टैक्स छूट कैसे पाएं?
1. tax saving FD का चयन करें
- Section 80C के तहत 5 साल की टैक्स सेविंग FD में निवेश करें।
- अधिकतम ₹1.5 लाख तक की छूट मिल सकती है।
2. Interest statement रखें
- हर साल FD का ब्याज स्टेटमेंट प्राप्त करें और ITR में दर्ज करें।
3. Form 26AS से मिलान करना न भूलें
- यदि बैंक ने TDS काटा है, तो उसका क्लेम जरूर करें।
- AIS (Annual Information Statement) भी देखें।
निष्कर्ष: FD ब्याज को नजरअंदाज करना न पड़े भारी
| ध्यान देने योग्य बातें | विवरण |
|---|---|
| FD ब्याज टैक्सेबल है | हर साल की इनकम में जोड़ें |
| TDS कटने पर | Form 26AS से जरूर मिलान करें |
| पेआउट डेट | वित्तीय वर्ष के अनुसार ब्याज जोड़ें |
| Form 15G/H | यदि टैक्स स्लैब से बाहर हैं तो भरें |
| सही ITR फॉर्म चुनें | और Schedule OS में ब्याज दर्ज करें |
FD में किया गया निवेश जितना सुरक्षित होता है, उतना ही जरूरी है कि उसकी टैक्स रिपोर्टिंग भी सही की जाए। मामूली लापरवाही भी टैक्स विभाग से नोटिस का कारण बन सकती है। इसलिए हर निवेशक को FD से मिलने वाली ब्याज आय को ईमानदारी से रिपोर्ट करना चाहिए।
अगर आप FD में निवेश करते हैं, तो यह भी उतना ही जरूरी है कि उसकी आय को ITR में सही और पूरी तरह से रिपोर्ट करें। यह न केवल कानूनन सही है, बल्कि भविष्य में टैक्स से जुड़ी किसी भी असुविधा से भी आपको बचाता है।
















