आज के दौर में हेल्थ इंश्योरेंस अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की जरूरत बन चुका है। बीते कुछ वर्षों में, खासकर कोरोना महामारी के बाद, लोगों में स्वास्थ्य और मेडिकल इमरजेंसी को लेकर गंभीरता काफी बढ़ी है। लेकिन, जब बात आती है नया हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने की, तो अधिकतर लोग जल्दबाजी में या अधूरी जानकारी के कारण गलत निर्णय ले बैठते हैं, जिसकी कीमत उन्हें इलाज के समय भारी आर्थिक बोझ के रूप में चुकानी पड़ती है।
इस लेख में हम विस्तार से चर्चा करेंगे उन 7 आम गलतियों पर जो लोग अक्सर नया हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय करते हैं। यदि आप पहली बार हेल्थ पॉलिसी लेने जा रहे हैं, तो इस गाइड को अंत तक पढ़ें, ताकि आप एक बेहतर, उपयुक्त और भरोसेमंद पॉलिसी का चुनाव कर सकें।
Contents
- 1 1. बिना जरूरत को समझे Policy खरीद लेना
- 2 2. Waiting period को नज़रअंदाज़ करना
- 3 3. Claim Settlement Ratio की अनदेखी करना
- 4 4. Cheap policy के चक्कर में अधूरी कवरेज लेना
- 5 5. Network Hospital की संख्या को नज़रअंदाज़ करना
- 6 6. Day care treatment की सुविधा न होना
- 7 7. Co-payment और sub-limit को अनदेखा करना
- 8 नया health insurance खरीदने से पहले याद रखें ये ज़रूरी बातें
- 9 निष्कर्ष:
1. बिना जरूरत को समझे Policy खरीद लेना
क्यों होती है ये गलती?
बहुत से लोग सिर्फ किसी परिचित के सुझाव, एजेंट की सलाह या विज्ञापन देखकर हेल्थ इंश्योरेंस खरीद लेते हैं, बिना यह जांचे कि उन्हें वास्तव में किस तरह की पॉलिसी की जरूरत है। नतीजा—या तो कवरेज पर्याप्त नहीं होता, या फिर प्रीमियम आपकी आय से असंगत होता है।
क्या करें?
- अपनी और परिवार की मेडिकल हिस्ट्री की जांच करें।
- पूर्व या वर्तमान में मौजूद बीमारियों की सूची बनाएं।
- उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, जीवनशैली और भविष्य की स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखकर पॉलिसी चुनें।
- यदि आप माता-पिता के लिए पॉलिसी ले रहे हैं, तो उनके लिए अलग से सीनियर सिटीजन हेल्थ प्लान पर विचार करें।
2. Waiting period को नज़रअंदाज़ करना
Waiting period क्या होता है?
हर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में एक वेटिंग पीरियड होता है यानी वह अवधि जिसमें बीमा कंपनी किसी बीमारी के लिए क्लेम स्वीकार नहीं करती। यह अवधि बीमा की शुरुआत की तारीख से लागू होती है।
उदाहरण के तौर पर:
| बीमारियों का प्रकार | वेटिंग पीरियड |
|---|---|
| सामान्य बीमारियाँ | 30 दिन |
| प्री-एक्सिस्टिंग डिज़ीज़ (जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन) | 2–4 साल |
| विशेष बीमारियाँ (हर्निया, पाइल्स आदि) | 1–2 साल |
क्या करें?
- पॉलिसी खरीदने से पहले यह स्पष्ट करें कि किस बीमारी के लिए कितना वेटिंग पीरियड है।
- जल्द इलाज की जरूरत हो तो ऐसी पॉलिसी चुनें जिसमें वेटिंग पीरियड कम हो।
3. Claim Settlement Ratio की अनदेखी करना
Claim Settlement Ratio (CSR) क्या है?
CSR दर्शाता है कि बीमा कंपनी ने कुल दायर क्लेम्स में से कितने क्लेम सफलतापूर्वक सेटल किए हैं। यह कंपनी की विश्वसनीयता का बड़ा संकेत होता है।
उदाहरण:
यदि किसी कंपनी ने 100 क्लेम्स में से 96 क्लेम्स सेटल किए, तो उसका CSR = 96%
क्या ध्यान दें?
- IRDAI (भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण) की वेबसाइट से CSR डेटा चेक करें।
- ऐसे प्लान को वरीयता दें जिनका CSR 95% या उससे अधिक हो।
- CSR केवल एक साल का नहीं, पिछले 3–5 वर्षों का औसत देखें।
4. Cheap policy के चक्कर में अधूरी कवरेज लेना
क्या है जोखिम?
कम प्रीमियम वाली पॉलिसी अक्सर रूम रेंट लिमिट, कम हॉस्पिटल नेटवर्क, लंबा वेटिंग पीरियड, या सीमित कवरेज जैसी पाबंदियों के साथ आती हैं। यह पॉलिसी दिखने में आकर्षक लग सकती है लेकिन जरूरत के समय अधूरी साबित होती है।
समाधान:
- कवरेज और प्रीमियम के बीच संतुलन बैठाएं।
- Comprehensive Health Insurance प्लान चुनें जिसमें अधिकतम डे केयर प्रोसीजर, अस्पताल नेटवर्क, और न्यूनतम एक्सक्लूज़न हो।
- फाइन प्रिंट पढ़ें और यह समझें कि पॉलिसी किन-किन बीमारियों को कवर करती है।
5. Network Hospital की संख्या को नज़रअंदाज़ करना
Network Hospital क्या होता है?
यह वे अस्पताल होते हैं जो इंश्योरेंस कंपनी के साथ टाई-अप में होते हैं और जिनमें कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है। नेटवर्क हॉस्पिटल कम होने का मतलब है इलाज के समय भुगतान में परेशानी।
क्यों जरूरी है?
- आपको क्लेम की रकम खुद नहीं चुकानी पड़ती।
- अस्पताल इंश्योरेंस कंपनी से सीधे भुगतान लेता है।
- प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होती है।
सुझाव:
- बीमा कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध नेटवर्क हॉस्पिटल की सूची देखें।
- यह सुनिश्चित करें कि आपके क्षेत्र या पसंदीदा हॉस्पिटल सूची में शामिल हैं।
6. Day care treatment की सुविधा न होना
Day care treatment क्या है?
ऐसे इलाज जो 24 घंटे की हॉस्पिटलाइज़ेशन के बिना भी किए जा सकते हैं, जैसे:
- कैटरैक्ट सर्जरी
- कीमोथेरेपी
- डायलिसिस
- रेडियोथेरेपी
- सर्जिकल ड्रेनेज आदि
आज क्यों जरूरी है?
अब अधिकतर सर्जरी डे केयर में कवर होती हैं। लेकिन कुछ पॉलिसियों में यह सुविधा सीमित होती है।
उपाय:
- ऐसी पॉलिसी चुनें जिसमें 400 से अधिक डे केयर ट्रीटमेंट शामिल हों।
- ट्रीटमेंट की सूची पढ़ें और यह सुनिश्चित करें कि आम बीमारियों का इलाज शामिल है।
7. Co-payment और sub-limit को अनदेखा करना
Co-payment क्या है?
इसका मतलब है कि क्लेम का एक हिस्सा आपको खुद वहन करना होगा।
उदाहरण: यदि को-पे 20% है और बिल ₹1 लाख है, तो ₹20,000 मरीज को चुकाना होगा।
Sub-limit क्या है?
पॉलिसी में रूम रेंट, ऑपरेशन या बीमारियों पर अधिकतम सीमा तय होती है।
उदाहरण: यदि रूम रेंट की सब-लिमिट ₹3,000/दिन है और आपके हॉस्पिटल का चार्ज ₹5,000/दिन है, तो अतिरिक्त ₹2,000 आपको देना होगा।
क्या करें?
- ऐसी पॉलिसी लें जिसमें को-पे और सब-लिमिट कम से कम हों या बिल्कुल न हों।
- खासकर सीनियर सिटीजन पॉलिसी में को-पे अधिक होता है, सावधानीपूर्वक पढ़ें।
नया health insurance खरीदने से पहले याद रखें ये ज़रूरी बातें
| बिंदु | क्यों जरूरी है |
|---|---|
| मेडिकल हिस्ट्री का मूल्यांकन | आपकी जरूरत के अनुसार पॉलिसी तय करने के लिए |
| वेटिंग पीरियड को जानना | तुरंत क्लेम की आवश्यकता की स्थिति में दिक्कत न हो |
| CSR देखना | विश्वसनीय इंश्योरेंस कंपनी चुनने के लिए |
| प्रीमियम बनाम कवरेज संतुलन | अधूरी पॉलिसी से बचने के लिए |
| नेटवर्क हॉस्पिटल की संख्या | कैशलेस इलाज के लिए |
| डे केयर ट्रीटमेंट की सुविधा | 24 घंटे से कम इलाज में भी क्लेम पाने के लिए |
| को-पे और सब-लिमिट समझना | अतिरिक्त खर्च से बचने के लिए |
निष्कर्ष:
health insurance खरीदना आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा का अहम कदम है। लेकिन यह कदम तभी फायदेमंद होगा जब आप इसे सोच-समझकर उठाएंगे। ऊपर बताए गए सभी बिंदुओं पर ध्यान देकर ही कोई पॉलिसी खरीदें।
सिर्फ प्रीमियम की दर को देखकर निर्णय न लें। पॉलिसी का कवरेज, नेटवर्क, क्लेम प्रक्रिया, CSR और एक्सक्लूज़न की जानकारी पूरी तरह से समझना अनिवार्य है। एक सही हेल्थ इंश्योरेंस न केवल इलाज के समय आपके वित्तीय बोझ को कम करता है, बल्कि आपको मानसिक शांति भी देता है।

















